हौसलों से पहाड़ों को ढहा जाएंगे
एक दिन खुद ही मंजिल को पा जाएंगे
जो डुबाते है हमको, बता दो उन्हें
हम न डूबे अगर,तो डूबा जाएंगे
तुम मसीहा समझते हो, जिनको यहां
मौका मिलते ही वो, तुम्हें खा जाएंगे
4 दिन ही सही,सिर उठा कर जिएं
जाते-जाते ये सबको बता जाएंगे
सो रहे हैं बरसों से, देश के नौजवान
हम जागे,तो सभी को जगा जायेंगे
रात दिन की मशक्कत है,किस के लिए
जो कमाया,यही पर लूटा जाएंगे
चाहे जितनी शिकायत हो हमसे, तुम्हें
देखना एक दिन रूला जाएंगे।