सोमवार, 30 अक्टूबर 2023
परिस्थितियों को दोष देना
गुरुवार, 12 जनवरी 2023
शायरी
रविवार, 16 जनवरी 2022
motivational kahani||प्रेरणादायक कहानी||शायरी||कविता||shayari||romantic shayari
रविवार, 26 दिसंबर 2021
प्रेरणादायक कहानी|| प्रेरणा दायक स्टोरी||हिन्दी शायरी
बुधवार, 22 दिसंबर 2021
रविवार, 28 नवंबर 2021
शुक्रवार, 26 नवंबर 2021
motivational quotes Hindi|| motivational shayari hindi
motivational quotes Hindi हिंदी शायरी। सुविचार
सोमवार, 25 अक्टूबर 2021
पाज़ीटिव राजनीति
सोमवार, 6 सितंबर 2021
आज का सुविचार| हिंदी शायरी|दर्द शायरी|Motivation quotes|Dard shayri|Bewfa shayri|Romantic shayri|सफलता का सूत्र|
सुविचार|शायरी|Motivation quotes|Dard shayari|love shayari|romantic shayari|hindi kahaniyan|
शनिवार, 4 सितंबर 2021
शुक्रवार, 3 सितंबर 2021
जिंदगी में संतुलन||शायरी|| हिंदी कहानियां||सुविचार|| Hindi kahaniya||love shayari||motivation quotes||महापुरुषों के विचार||
बुधवार, 9 जून 2021
कौन थे बिरसा मुंडा। #जय_जय_बिरसा #mohan_mohare
शुक्रवार, 4 जून 2021
Hindi shayari||hindi love shayari||hindi poetry||Hindi motivation shayari Quotes|| फर्क था हम दोनों की मोहब्बत में। Mohan Mohare #mohan_mohare
याद तुम्हें भी आएंगे।Mohan Mohare #Mohan_mohare
रविवार, 6 सितंबर 2020
टंट्या मामा भील। " जय आदिवासी।।
टंट्या भील [ इंडियन रोबिंहुड ] का नाम सबसे बड़े व्यक्ति के रुप मे लिया जाता है वे बड़े योद्दा थे । आज भी बहुत आदिवासी घरो मे टंट्या भील कि पुजा कि जाती है,कहा जाता है कि टंट्या भील को सभी जानवरो कि भाषा आती थी, टंट्या भील के आदिवासीयों ने देवता कि तरह माना था, आदिवासी जन आज भी कहते है,कि टंट्या भील को अलओकिक शक्ति प्राप्त थी, इन्ही शक्तियों के सहारे टंट्या भील एक ही समय 1700 गाँवो मे ग्राम सभा लिया करते थे,इन्ही शक्तियो के कारण अंग्रेजों के 2000 सैनिको के द्वारा भी टंट्या भील को कोई पकड़ नही पाता था । टंट्या भील देखते ही देखते अंग्रेजों के आँखो के साम्नने से ओझल हो जाते थे। कहा जाता है, कि टंट्या भील लाखो आदिवासी झगड़ो को ग्रामसभा मे ही हल किया कर देते थे,टंट्या भील , इनके पिता जी का नाम भाऊ सिंह भील था ।
| Tantiya Bhil | |
|---|---|
जीवन परिचय | |
| जन्म | 1840/1842 khandwa, Madhya Pradesh, India |
| मृत्यु | 1890 Jabalpur, Madhya Pradesh, India |
| मृत्यु का कारण | Hanged |
| स्मारक समाधि | Patalpani, Madhya Pradesh) |
| प्रसिद्धि कारण | First War of Independence |
| अंतिम स्थान | Patalpani, Madhya Pradesh) |
में जाँबाजी का अमिट अध्याय बन चुके आदि विद्रोही टंट्या भील अंग्रेजी दमन को ध्वस्त करने वाली जिद तथा संघर्ष की मिसाल है। टंट्या भील के शौर्य की छबियां वर्ष 1857 के बाद उभरीं। जननायक टंट्या ने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा ग्रामीण आदिवासी जनता के साथ शोषण और उनके मौलिक अधिकारों के साथ हो रहे अन्याय-अत्याचार की खिलाफत की। दिलचस्प पहलू यह है कि स्वयं प्रताड़ित अंग्रेजों की सत्ता ने जननायक टंट्या को “इण्डियन रॉबिनहुड’’ का खिताब दिया। मध्यप्रदेश के जननायक टंट्या भील को वर्ष 1889 में कुछ जयचंद की वजह से फाँसी दे दी गई।
🏹🏹🏹🏹जय आदिवासी 🏹🏹🏹🏹


