सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

परिस्थितियों को दोष देना

Mohan Mohare.परिस्थितियों को दोष देना 
best inspirational story
कुछ लोग हमेशा परिस्थितियों  को ही दोष देते है
यह motivational story ऐसी है
जिसको सुनकर आपकी आंखें खुल सकती है
इस कहानी को जल्दी से जल्दी  शुरू करते हैं

काफी समय पहले की बात है दोस्तों
एक आदमी रेगिस्तान में फंस गया था 
वह मन ही मन अपने आप को बोल रहा था कि यह कितनी अच्छी और सुंदर जगह है
अगर यहां पर पानी होता तो यहां पर कितने अच्छे-अच्छे पेड़ उग रहे होते 
और यहां पर कितने लोग घूमने आना चाहते होंगे
 मतलब ब्लेम कर रहा था
 कि यह होता तो वो होता  और वो होता  तो शायद ऐसा होता 
ऊपरवाला देख रहा था अब उस इंसान ने सोचा यहां पर पानी नहीं दिख रहा है 
उसको थोड़ी देर आगे जाने के बाद उसको एक कुआं दिखाई दिया जो कि
 पानी से लबालब भरा हुआ था काफी देर तक
 विचार-विमर्श करता रहा खुद से

 फिर बाद उसको वहां पर एक रस्सी और बाल्टी  दिखाई दी  इसके बाद कहीं से
एक पर्ची उड़ के आती है जिस पर्ची में लिखा हुआ था कि तुमने कहा था कि
यहां पर पानी का कोई स्त्रोत  नहीं है अब तुम्हारे पास पानी का स्रोत भी है
अगर तुम चाहते हो तो यहां पर पौधे लगा सकते हो
वह चला गया दोस्तों
 तो यह कहानी हमें क्या सिखाती है
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि
अगर आप परिस्थितियों को दोष देना चाहते हो कोई दिक्कत नहीं है
 लेकिन आप परिस्थितियों को दोष देते हो कि अगर यहां पर ऐसा  हो और
आपको वह सोर्सेस मिल जाए तो क्या परिस्थिति को बदल सकते हो

 इस कहानी में तो यही लगता है कि कुछ लोग सिर्फ परिस्थिति को दोष देना जानते हैं
अगर उनके पास उपयुक्त स्रोत हो तो वह परिस्थिति को नहीं बदल सकते
सिर्फ वह ब्लेम करना जानते हैं लेकिन हमे ऐसा  नहीं बनना है दोस्तों
 इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि अगर आप चाहते हो कि
 परिस्थितियां बदले और आपको अगर उसके लिए उपयुक्त साधन मिल जाए तो
आप अपना एक परसेंट योगदान तो दे ही सकते हैं और
मुझे पूरा भरोसा है कि अगर  आपके साथ ऐसी कोई घटना घटित होती है

गुरुवार, 12 जनवरी 2023

शायरी

🚶 चलता रहूंगा अकेला सही,
नहीं चाहिए दोगलों का साथ।

पंसद नहीं मुझे मतलबी लोगों का हाथ 🤝।।
_Mohan Mohare
Mo.9131795188
#mohan_mohare

रविवार, 16 जनवरी 2022

motivational kahani||प्रेरणादायक कहानी||शायरी||कविता||shayari||romantic shayari


1. हार गया लेकिन खुद से जीत गया
hindi motivational story

दोस्तों नमस्कार आप सभी का स्वागत है
आज मैं आपको एक ऐसी motivational stories बता रहा हु जिसे पढ़ने के बाद 
आपकी ऊर्जा पहले जैसी नही रहेगी तो चलिए
बिना आपका समय गवाये motivational story को शुरू करते है
 
हरीश नाम का एक लड़का था उसको दौड़ने का बहुत शौक था 
वह कई मैराथन में हिस्सा ले चुका था
परंतु वह किसी भी race को पूरा नही करता था
एक दिन उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वह race पूरी जरूर करेगा
अब रेस शुरू हुई 

 

हरीश ने भी दौड़ना शुरू किया धीरे 2
सारे धावक आगे निकल रहे थे
मगर अब हरीश थक गया था
वह रुक गया
फिर उसने खुद से बोला अगर मैं दौड़ नही सकता तो 
कम से कम चल तो सकता हु
उसने ऐसा ही किया वह धीरे 2
चलने लगा मगर वह आगे जरूर बढ़ रहा था
अब वह बहुत ज्यादा थक गया था
और नीचे गिर पड़ा

 

उसने खुद को बोला
की वह कैसे भी करके आज दौड़ को पूरी जरूर करेगा
वह जिद करके वापस उठा
लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा और अंततः वह रेस पूरी कर गया
माना कि वह रेस हार चुका था
लेकिन आज उसका विश्वास चरम पर था क्योंकि आज से पहले
 race को कभी पूरा ही नही कर पाया था
वह जमीन पर पड़ा हुआ था
क्योंकि उसके पैरों की मांसपेशियों में बहुत खिंचाव हो चुका था
लेकिन आज वह बहुत खुश था
क्योंकि
आज वह हार कर भी जीता था
motivational story in hindi for success
दोस्तों हम भी तो इस तरह की गलती करते है हमारी life में
कभी भी अगर कोई परेशानी होती है तो उस काम को नही करते और छोड़ देते है
अगर आप एक student हो और रोज 10 hr की study करते हो
और किसी दिन कोई परेशानी की वजह से आप पढ़ाई नही करते मगर आपको
भले ही 5 hr मिले पढ़ना जरूर चाहिए
हरीश की कहानी से हमे यही सीखने को मिलता है कि अगर हम
लगातार आगे बढ़ते रहे तो एक दिन हम हारकर भी जीत
जाएंगे

 

छोटे छोटे कदम बढ़ाते जाओ और आगे बढ़ते जाओ
यही सफलता का नियम है
अगर आपको भी ये motivational story अच्छी लगी हो तो

रविवार, 26 दिसंबर 2021

प्रेरणादायक कहानी|| प्रेरणा दायक स्टोरी||हिन्दी शायरी

शहर के मशहूर लोहार के पास एक नौजवान आया और बोला ...मुझे एक ऐसी तलवार बना दो जो सबसे अलग हो क्योंकि मुझे बादशाह की फौज के लिए जंग में जाना है। मैं कुछ कमाल करना चाहता हूँ।

लोहार ने उसकी बातों को बेहद गंभीरता से सुना और कहा कि ऐसी तलवार बनाने में समय लगता है । आपको एक साल तक इंतजार करना होगा......?

नौजवान तैयार हो गया।

लोहार ने उससे कहा कि अब आप एक साल फ्री हैं तो ऐसा करो कि तलवार चलाने की कला तलवार के गुरू से सीखो। आपकी ये तलवार बहुत खास होगी। इसलिए किसी माहिर गुरु का छात्र होना ज़रूरी है।

नौजवान ने प्रशिक्षण शुरू कर दिया।

एक साल बाद वो लोहार के पास आया और उससे अपनी तलवार ले ली। जंग में गया, खूब तारीफ और नाम कमाया।

जब नौजवान जंग से लौटकर लोहार का शुक्रिया अदा करने आया तो लोहार ने कहा कि शुक्रिया उस उस्ताद का अदा करो जिससे तुमने तलवारबाज़ी की कला सीखी । तुम्हारी ये तलवार भी आम तलवार के जैसी ही थी जो दो दिन में बन गई थी ।

नौजवान को अब ये समझते देर न लगी कि " यह आपकी कला औऱ हुनर ही है जो एक साधारण चीज़ को भी ख़ास बनाती है। प्रशिक्षण औऱ निरंतर अभ्यास वह जादू है जो किसी भी कार्य के परिणाम को इतना विशेष बनाता है कि देखने वालों को लगता है कि यह जादू है, क्योंकि प्रशिक्षण ही आत्मविश्वास देता है। 

इसलिए आत्मविश्वास एक जादू है। ये जादू आपसे कुछ भी करवा सकता है, अगर आपको इसका मंत्र मालुम हो।

बुधवार, 22 दिसंबर 2021

शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

motivational quotes Hindi|| motivational shayari hindi

सपने और लक्ष्य में एक ही अंतर है
सपने के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए
और लक्ष्य के लिए बिना नींद की मेहनत

motivational quotes Hindi हिंदी शायरी। सुविचार

आप वो काम करें 
जिसमे आपको मज़ा आता है
वरना आप सारी ज़िन्दगी 
किसी और की ज़िन्दगी जीते रहेंगे

सोमवार, 25 अक्टूबर 2021

पाज़ीटिव राजनीति

महान नेता बनने की कोई ख़्वाहिश नहीं मेरी
करूँ ख़ुद को साबित ये आजमाइश नहीं मेरी
समाज सेवा हित में चाहिए सहयोग आपका
इसके अलावा और कोई फरमाइश नहीं मेरी

हर सामाजिक समस्या का समाधान बन जाऊँ
ज़रूरतमंदों की ज़रूरत का सामान बन आऊँ
बन के नेता नेतागिरी करने का शौक़ नहीं मुझे
चाहत है समाज सेवा का दूसरा नाम बन जाऊँ

सोमवार, 6 सितंबर 2021

आज का सुविचार| हिंदी शायरी|दर्द शायरी|Motivation quotes|Dard shayri|Bewfa shayri|Romantic shayri|सफलता का सूत्र|

कुछ आरम्भ करने के लिए,
आप का महान होना कोई आवश्यक नहीं।

 लेकिन महान होने के लिए,
आप का कुछ आरम्भ करना आवश्यक है

सुविचार|शायरी|Motivation quotes|Dard shayari|love shayari|romantic shayari|hindi kahaniyan|

हौसलों से पहाड़ों को ढहा जाएंगे
एक दिन खुद ही मंजिल को पा जाएंगे

जो डुबाते है हमको, बता दो उन्हें
हम न डूबे अगर,तो डूबा जाएंगे

तुम मसीहा समझते हो, जिनको यहां
मौका मिलते ही वो, तुम्हें खा जाएंगे

4 दिन ही सही,सिर उठा कर जिएं
जाते-जाते ये सबको बता जाएंगे
सो रहे हैं बरसों से, देश के नौजवान
हम जागे,तो सभी को जगा जायेंगे

रात दिन की मशक्कत है,किस के लिए
जो कमाया,यही पर लूटा जाएंगे

चाहे जितनी शिकायत हो हमसे, तुम्हें
देखना एक दिन रूला जाएंगे।

शुक्रवार, 3 सितंबर 2021

जिंदगी में संतुलन||शायरी|| हिंदी कहानियां||सुविचार|| Hindi kahaniya||love shayari||motivation quotes||महापुरुषों के विचार||

हमारे जमाने में साइकिल तीन चरणों में सीखी जाती थी , 
पहला चरण   -   कैंची 
दूसरा चरण    -   डंडा 
तीसरा चरण   -   गद्दी ...
*तब साइकिल की ऊंचाई 24 इंच हुआ करती थी जो खड़े होने पर हमारे कंधे के बराबर आती थी ऐसी साइकिल से गद्दी चलाना मुनासिब नहीं होता था।*
*"कैंची" वो कला होती थी जहां हम साइकिल के फ़्रेम में बने त्रिकोण के बीच घुस कर दोनो पैरों को दोनो पैडल पर रख कर चलाते थे*।
और जब हम ऐसे चलाते थे तो अपना सीना तान कर टेढ़ा होकर हैंडिल के पीछे से चेहरा बाहर निकाल लेते थे, और *"क्लींङ क्लींङ" करके घंटी इसलिए बजाते थे ताकी लोग बाग़ देख सकें की लड़का साईकिल दौड़ा रहा है* ।
*आज की पीढ़ी इस "एडवेंचर" से महरूम है उन्हे नही पता की आठ दस साल की उमर में 24 इंच की साइकिल चलाना "जहाज" उड़ाने जैसा होता था*।
हमने ना जाने कितने दफे अपने *घुटने और मुंह तोड़वाए है* और गज़ब की बात ये है कि *तब दर्द भी नही होता था,* गिरने के बाद चारो तरफ देख कर चुपचाप खड़े हो जाते थे अपना हाफ कच्छा पोंछते हुए।
अब तकनीकी ने बहुत तरक्क़ी कर ली है पांच साल के होते ही बच्चे साइकिल चलाने लगते हैं वो भी बिना गिरे। दो दो फिट की साइकिल आ गयी है, और *अमीरों के बच्चे तो अब सीधे गाड़ी चलाते हैं छोटी छोटी बाइक उपलब्ध हैं बाज़ार में* ।
मगर आज के बच्चे कभी नहीं समझ पाएंगे कि उस छोटी सी उम्र में बड़ी साइकिल पर संतुलन बनाना जीवन की पहली सीख होती थी!  *"जिम्मेदारियों" की पहली कड़ी होती थी जहां आपको यह जिम्मेदारी दे दी जाती थी कि अब आप गेहूं पिसाने लायक हो गये हैं* ।
*इधर से चक्की तक साइकिल ढुगराते हुए जाइए और उधर से कैंची चलाते हुए घर वापस आइए* !
और यकीन मानिए इस जिम्मेदारी को निभाने में खुशियां भी बड़ी गजब की होती थी।
और ये भी सच है की *हमारे बाद "कैंची" प्रथा विलुप्त हो गयी* ।
हम लोग  की दुनिया की आखिरी पीढ़ी हैं जिसने साइकिल चलाना तीन चरणों में सीखा !
*पहला चरण कैंची*
*दूसरा चरण डंडा*
*तीसरा चरण गद्दी।*
● *हम वो आखरी पीढ़ी  हैं*, जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।
● *हम वो आखरी लोग हैं*, जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं

#mohan_mohare

बुधवार, 9 जून 2021

कौन थे बिरसा मुंडा। #जय_जय_बिरसा #mohan_mohare

9 जून : बिरसा मुंडा कौन थे, जानिए उनकी शहादत के बारे में




जन्म- 15 नवंबर 1875
मृत्यु- 9 जून 1900

बिरसा मुंडा का जन्म 

आदिवासियों के महानायक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के आदिवासी दम्पति सुगना और करमी के घर हुआ था। भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया।
बिरसा मुंडा ने साहस की स्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की शब्दावली रची। उन्होंने हिन्दू धर्म और ईसाई धर्म का बारीकी से अध्ययन किया तथा इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आदिवासी समाज मिशनरियों से तो भ्रमित है ही हिन्दू धर्म को भी ठीक से न तो समझ पा रहा है, न ग्रहण कर पा रहा है।



बिरसा मुंडा ने महसूस किया कि आचरण के धरातल पर आदिवासी समाज अंधविश्वासों की आंधियों में तिनके-सा उड़ रहा है तथा आस्था के मामले में भटका हुआ है। उन्होंने यह भी अनुभव किया कि सामाजिक कुरीतियों के कोहरे ने आदिवासी समाज को ज्ञान के प्रकाश से वंचित कर दिया है। धर्म के बिंदु पर आदिवासी कभी मिशनरियों के प्रलोभन में आ जाते हैं, तो कभी ढकोसलों को ही ईश्वर मान लेते हैं।



भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में आदिवासी समाज झुलस रहा था। बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को शोषण की नाटकीय यातना से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें तीन स्तरों पर संगठित करना आवश्यक समझा।

1. पहला तो सामाजिक स्तर पर ताकि आदिवासी-समाज अंधविश्वासों और ढकोसलों के चंगुल से छूट कर पाखंड के पिंजरे से बाहर आ सके। इसके लिए उन्होंने ने आदिवासियों को स्वच्छता का संस्कार सिखाया। शिक्षा का महत्व समझाया। सहयोग और सरकार का रास्ता दिखाया।
सामाजिक स्तर पर आदिवासियों के इस जागरण से जमींदार-जागीरदार और तत्कालीन ब्रिटिश शासन तो बौखलाया ही, पाखंडी झाड़-फूंक करने वालों की दुकानदारी भी ठप हो गई। यह सब बिरसा मुंडा के खिलाफ हो गए। उन्होंने बिरसा को साजिश रचकर फंसाने की काली करतूतें प्रारंभ की। यह तो था सामाजिक स्तर पर बिरसा का प्रभाव। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया।

2. दूसरा था आर्थिक स्तर पर सुधार ताकि आदिवासी समाज को जमींदारों और जागीरदारों क आर्थिक शोषण से मुक्त किया जा सके। बिरसा मुंडा ने जब सामाजिक स्तर पर आदिवासी समाज में चेतना पैदा कर दी तो आर्थिक स्तर पर सारे आदिवासी शोषण के विरुद्ध स्वयं ही संगठित होने लगे। बिरसा मुंडा ने उनके नेतृत्व की कमान संभाली। आदिवासियों ने 'बेगारी प्रथा' के विरुद्ध जबर्दस्त आंदोलन किया। परिणामस्वरूप जमींदारों और जागीरदारों के घरों तथा खेतों और वन की भूमि पर कार्य रूक गया।

3. तीसरा था राजनीतिक स्तर पर आदिवासियों को संगठित करना। चूंकि उन्होंने सामाजिक और आर्थिक स्तर पर आदिवासियों में चेतना की चिंगारी सुलगा दी थी, अतः राजनीतिक स्तर पर इसे आग बनने में देर नहीं लगी। आदिवासी अपने राजनीतिक अधिकारों के प्रति सजग हुए।



बिरसा मुंडा सही मायने में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे। बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है। 

ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था। जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए।

शुक्रवार, 4 जून 2021

रविवार, 6 सितंबर 2020

टंट्या मामा भील। " जय आदिवासी।।

 टंट्या भील [ इंडियन रोबिंहुड ] का नाम सबसे बड़े व्यक्ति के रुप मे लिया जाता है वे बड़े योद्दा थे । आज भी बहुत आदिवासी घरो मे टंट्या भील कि पुजा कि जाती है,कहा जाता है कि टंट्या भील को सभी जानवरो कि भाषा आती थी, टंट्या भील के आदिवासीयों ने देवता कि तरह माना था, आदिवासी जन आज भी कहते है,कि टंट्या भील को अलओकिक शक्ति प्राप्त थी, इन्ही शक्तियों के सहारे टंट्या भील एक ही समय 1700 गाँवो मे ग्राम सभा लिया करते थे,इन्ही शक्तियो के कारण अंग्रेजों के 2000 सैनिको के द्वारा भी टंट्या भील को कोई पकड़ नही पाता था । टंट्या भील देखते ही देखते अंग्रेजों के आँखो के साम्नने से ओझल हो जाते थे। कहा जाता है, कि टंट्या भील लाखो आदिवासी झगड़ो को ग्रामसभा मे ही हल किया कर देते थे,टंट्या भील , इनके पिता जी का नाम भाऊ सिंह भील था ।

Tantiya Bhil
जीवन परिचय

जन्म1840/1842
khandwaMadhya PradeshIndia
मृत्यु1890
JabalpurMadhya PradeshIndia
मृत्यु का कारणHanged
स्मारक समाधिPatalpaniMadhya Pradesh)
प्रसिद्धि कारणFirst War of Independence
अंतिम स्थानPatalpaniMadhya Pradesh)

में जाँबाजी का अमिट अध्याय बन चुके आदि विद्रोही टंट्या भील अंग्रेजी दमन को ध्वस्त करने वाली जिद तथा संघर्ष की मिसाल है। टंट्या भील के शौर्य की छबियां वर्ष 1857 के बाद उभरीं। जननायक टंट्या ने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा ग्रामीण आदिवासी जनता के साथ शोषण और उनके मौलिक अधिकारों के साथ हो रहे अन्याय-अत्याचार की खिलाफत की। दिलचस्प पहलू यह है कि स्वयं प्रताड़ित अंग्रेजों की सत्ता ने जननायक टंट्या को “इण्डियन रॉबिनहुड’’ का खिताब दिया। मध्यप्रदेश के जननायक टंट्या भील को वर्ष 1889 में कुछ जयचंद की वजह से फाँसी दे दी गई।


        🏹🏹🏹🏹जय आदिवासी 🏹🏹🏹🏹


बुधवार, 24 जून 2020

आजादी में आदिवासी समाज की भुमिका

देश की आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आदिवासी समाज ने कभी भी अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी स्वीकार नहीं की है। आदिवासी समाज के टंट्या मामा भील ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। और अंग्रेजो के छक्के छुड़ा दिए थे।
 


अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में अंग्रेजों को मार गिराने वाले टंट्या मामा को अंग्रेजों ने इंडियन राबिन हुड की उपाधि दी है। टंट्या मामा कभी भी गरीबों को भुखा नहीं सोने देते थे।वो अंग्रेजी सरकार से लुटकर अनाज गरीबों में बांट दिया करते थे। 

🏹🏹🏹🏹🏹।।जय आदिवासी।।🏹🏹🏹🏹

रविवार, 24 मई 2020

संविधान की रक्षा करना

दोस्तों आज कल कुछ असमाजिक तत्व संविधान के विरुद्ध जाकर देश में अनैतिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
हमें इन लोगो से समाज व देश को बचाना है, संविधान को बचाना है। जय हिन्द जय भारत।